
घर (Ghar)
सवाल तो कई हैं पर अब घर तो घर है, जरूरतों को पूरा करने का घर, तन का घर-मन का घर, मेरा घर, उसका घर, छत वाला घर, खपरैलों में छुपा घर या फिर एक...
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This podcast has some good content, some well written poetry and stories. Here I'm reciting some old stuf I've written so far. Support this podcast:

सवाल तो कई हैं पर अब घर तो घर है, जरूरतों को पूरा करने का घर, तन का घर-मन का घर, मेरा घर, उसका घर, छत वाला घर, खपरैलों में छुपा घर या फिर एक...

________________________ पुराने वृक्षों की खाल की रन्ध्रों में उग आते हैं छोटे-बड़े छातेनुमा पीले, मटमैले मशरूम मेरी पुरानी स्मृतियों में जिस...

Khayal hi nahi, ishq bhi hai intezaarnama.

केदारनाथ सिंह शायद हिन्दी के समकालीन काव्य परिदृश्य में अकेले ऐसे कवि हैं, जो एक ही साथ गाँव के भी कवि हैं और शहर के भी। उनकी यह कविता शायद...

एक अहसास कि माँ अभी मेरी हथेली पर अपना हाथ मल कर गईं और छोड़ गईं खुद को शीशे में, मुझ में...

इतिहास में इंतजार की कोई जगह नहीं होती। इन्तज़ारनामा 2, ऑडियो- Santoor Flute Raag Jhinihoti by Pt. Shri Shiv kumar sharma, Pt. Shri Hariprasa...

मेरा तुम्हारे लिए अव्यवस्थित ढंग से किया गया प्रेम हमेशा सबसे सुंदर रहा।। Poem by - Ankit

बहुत दिनों से फूल धरे हैं घर में टेबल की छत्ती पर मुरझाए से सिकुड़े सारे जैसे मेरा मन मुरझाया, मेरे मन के मुरझाने पर तुम तो पानी दे आँखों का...

चिट्ठी खतम हो गयी थी। प्रेमनुराग आँखों से जलप्रपात की तरह तरल हो निकला था। तभी विविध भारती में घर के बाहर से जाती कार में सुनाई दिया। बाबूजी...

हम कई बार जी लेना चाहते हैं, कविताओं में, वक़्तों के हिस्सों में, उसी जगह से एक कविता.-- मेरी सारी कविताओं में सिमट जाते हैं हम दोनों- खिलखिल...

इमैजिनेशन की वो दुनिया जिसमें सब खूबसूरत है, बेहद खूबसूरत, आपके लिये।।

हमेशा की तरह हतप्रभ कर देने वाले विनोद कुमार शुक्ल जी की यह कविता...

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ साहब की ये नज़्म जो रिश्ते बयां करती है।।

Let's define the beauty...

जीवन की अनियमितताएं, सच, मृत्यु, सब कुछ एक मात्र फूल में निहित...!!

चिट्ठियां कैप्शन नहीं ले कर चलतीं।

Science is fiction, Spirituality is real or Science is real and Spirituality is function ? Choose wisely, until then, listen this poem.

प्रेमानुभूति प्रक्रिया से क्रिया का सफलतम रूप होती है।

दिसम्बर के दिन सालों से पुछल्ले माने जाते रहे हैं पर असल में नीव की तरह काम में लगे होते हैं वो भी आगे आने वाले साल के लिए। इसी कोशिश में ये...

Translation by Ankit, Written by Pablo Neruda.. It's just a try...