
घर (Ghar)
Apr 9, 2024 - 00:02:52
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हम कई बार जी लेना चाहते हैं, कविताओं में, वक़्तों के हिस्सों में, उसी जगह से एक कविता.-- मेरी सारी कविताओं में सिमट जाते हैं हम दोनों- खिलखिलाकर गले लगते हैं कहते हैं दो-चार बातें और हो जाते हैं अपने आप में मशरूफ़- किसी दि...