
Amritvani - English
Aug 19, 2025
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गुरु बिन कौन सम्हारे ।को भव सागर पार उतारे ॥ टूटी फूटी नाव हमारीपहुँच न पाई तट पर ।जैसे कोई प्यासा राही ।भटक गया पनघट पर ।पास खड़ा गुरु मुस्काता है ।दोनों बाँह पसारे।वो भवसागर पार उतारे ।गुरु बिन ... मेरे राम मुझे शक्ति...